आज का ये सॉफ्टवेयर इंजीनियर कभी था एक मामूली सा डिलीवरी बॉय, आज अपनी इस सफलता के मन्त्र से दे रहा है दुनिया को मिसाल

शेख अब्दुल सत्तार ने भी अपने पापा और अपना सपना पूरा करने की थान ली

ज़िंदगी में हमे बहुत से ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जिनका समाधान मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है, और इसी दुनिया में कई ऐसे लोग भी होते है, जो उन मुश्किलों का सामना हसकर करते है, और एक नया आयाम ही बना देते। है देश ने कुछ समय पहले कोरोना काल जैसी महामारी झेली, और एक ये समय ऐसा रहा है, जिसमे कई लोगो ने कई तरह से खुद को साबित किया। और आज हम एक ऐसे शख्स  शेख अब्दुल सत्तार की कहानी लेकर आये है, जिनके बारे में जानकार आप हैरानी में पड़ जाएंगे, क्योकि उन्होंने एक जोमाटो के डिलीवरी बॉय से लेकर इंजीनियर बनने तक का सफर तय किया। जी हाँ इनके होंसले को दुनिया सलाम कर रही है। इनका नाम है शेख अब्दुल सत्तार। आज आज की इस खास कहानी में हम इनके संघर्ष के बारे में जानेंगे।

लोकडाउन में शुरू किया था डिलीवरी बॉय का काम
लोकडाउन में शुरू किया था डिलीवरी बॉय का काम

लॉकडाउन में शुरू किया था डिलीवरी बॉय का काम

जैसे की आपको पता है, कि लॉकडाउन में मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। लोगो को काम के लिए दर-दर भटकना पड़ा था। वही लोगों ने अपना पेट पालने क लिए कई सारे काम करने लगे थे। कहीं ग्रेजुएट चाय वाली तो, कही लोगों ने डिलीवरी का काम किया। तो कहीं लोगों ने अपने कार को ही अपनी दूकान बना डाली। कुछ ऐसे शेर भी है, जो कि अपने परिवार को आर्थिक रूप से मदद करने के लिए जो काम मिला लिए ऐसे ही हमारे शेर है, शेख अब्दुल सत्तार, जिन्होंने पढ़ाई क साथ-साथ डिलीवरी बॉय का काम किया। और अपना घर भी सम्भाला। पढ़ाई ही में भी नंबर वन, और बेटे की भूमिका में भी नंबर वन। जिंदगी की रेस के अच्छी ताल बिठाई और सफलता भी हासिल की।

 जोमाटो के डिलीवरी बॉय से लेकर इंजीनियर बनने तक का सफर तय किया।
जोमाटो के डिलीवरी बॉय से लेकर इंजीनियर बनने तक का सफर तय किया।

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कैसा रहा इंजीनियरिंग तक का सफर शेख अब्दुल सत्तार

सॉफ्टवेयर इंजीनियर तक का सफर इतना आसान नहीं था। कभीं -कभी रातों में भी जग कर अपना काम किया और पढाई की। साथ ही साथ अपने पापा की भी मदद की लेकिन कहते है न कि, जब कोई काम करने की ठान लेता है, न तो वो करके रहता है। शेख अब्दुल सत्तार ने भी अपने पापा और अपना सपना पूरा करने की थान ली थी। और कड़ी मेहनत के साथ उन्होंने सफलता हासिल की। आज वो एक अच्छी कंपनी में एक अच्छी सैलरी के साथ काम कर रहे है। अपने परिवार को भी संभाल रहे है। उनके माता पिता अपने बेटे की सफलता से बहुत ही खुश है, और गर्व महसूस कर रहे है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर तक का सफर इतना आसान नहीं था।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर तक का सफर इतना आसान नहीं था।

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