बचपन में माँ के साथ घर संवारा करती थी, लेकिन कब वो कला बन गयी पता नहीं चला, आज बेकार पड़े कबाड़ से बना डाली ये गज़ब की चीज़, कि आप भी…

रुचि गोयल जी को बचपन से ही कला करने का शौक था।

कला तो आपने कई तरह की देखी होगा, लेकिन दोस्तों आज की दुनिया में ऐसे कई तरह की कला आए हैं ,जिसे लोग लोगों के मन को मोहित कर रहे हैं। लोगों की कला को देखकर आप भी अचरज में पड़ जाएंगे ,ऐसा भी हो सकता है क्या? कभी आपने रेत में बनते हुए पेंटिंग देखी होगी ,तो किसी ने सिरफ दीवार पर रंग छिड़ककर एक सुंदर चित्रकारी कर दी। जी हां दोस्तों ,आज हम आपके सामने एक ऐसी कहानी लेकर आए हैं। जिसमें एक महिला रुचि गोयल ने घर में पड़े कबाड़ चीजों से सुंदर सा गार्डन बना डाला।

कबाड़ से बना डाला गॉर्डन
कबाड़ से बना डाला गॉर्डन

कबाड़ से बना डाला गॉर्डन (रुचि गोयल)

हां दोस्तों, आपने सही सुना, कबाड़ पड़े चीजों से उन्होंने एक सुंदर सा गार्डन बना डाला है ।जिसकी खूबसूरती तो देखने को ही बनती है। जहां कबाड हमारे घर की सुंदरता को बेकार करता है। वहां उन्होंने इसका प्रयोग करके अपने घर को और भी सुंदर और चमकदार बना दिया है। जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग उनके घर पर आ रहे हैं। और उनकी खूब तारीफ कर है। जी हां दोस्तों, आइए आज हम मिलते हैं ऐसे ही एक महिला के से जिसका नाम है ,रुचि गोयल जो कि उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। आइए हम आपको इसके बारे में कुछ और बताते हैं।

उत्तरप्रदेश, के गाजियाबाद की रहनेवाली रुचि गोयल ,उन्हीं क्रिएटिव लोगों में शामिल हैं।
उत्तरप्रदेश, के गाजियाबाद की रहनेवाली रुचि गोयल ,उन्हीं क्रिएटिव लोगों में शामिल हैं।

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बचपन से ही था कला का शौक

रुचि गोयल जी को बचपन से ही काला करने का शौक था। वह अपनी माताजी का मदद करती थी ,घर संवारने में। और ऐसे ही ऐसे वह धीरे-धीरे खराब चीजों को भी ,सुंदर बनाना सीख गई,और उनमें यह कला कब आ गयी यह तो उन्हें पता भी नहीं चला। उत्तरप्रदेश, के गाजियाबाद की रहनेवाली रुचि गोयल ,उन्हीं क्रिएटिव लोगों में शामिल हैं। जो पुरानी चीजों को नया रूप देकर उसे खुबसूरत बना देती हैं। जी हां दोस्तों ,रुचि गोयल जी एक शादीशुदा महिला है। और इनकी इस कला से मायके वाले और ससुराल वाले दोनों खुश हैं। रुचि गोयल जी के घर में कोई भी ऐसा समान नहीं होता, जो कि कबाड़ में चला जाए। क्योकि उन सब चीजों से ये अपने घर को इतने अच्छे तरीके से ,इतने अच्छे ढंग से सजा देती हैं, कि कोई कह नहीं सकता है कि कबाड़ है। कबाड़ का सही तरीके से प्रयोग करना तो कोई इनसे सीखे।

कबाड़ से ये अपने घर को इतने अच्छे तरीके से ,इतने अच्छे ढंग से सजा देती हैं,
कबाड़ से ये अपने घर को इतने अच्छे तरीके से ,इतने अच्छे ढंग से सजा देती हैं,

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