फटककर रोने लगा ये बूढ़ा ब्राह्मण, तो जज ने दिखाई दरियादिली, बेटी के ब्याह के लिए बैंक से लिया था क़र्ज़, तो ना लौटाने पर जज ने दिया सारा पैसा

यह किस्सा जहानाबाद का है। जहां शनिवार के दिन अदालत में सुनवाई की गई।

आज जहां लोग एक दूसरे की मदद नहीं करना चाहते हैं। सिर्फ अपने से मतलब रखते हैं या पैसों से। वहीं आजकल कुछ ऐसे लोग हैं ,जो मिसाल बन कर तथा उदाहरण बन कर सामने आते हैं। और इंसानियत अभी भी जिंदा है, इसका सबूत देते हैं। जी हां दोस्तों ऐसा ही कुछ हुआ है, जहांनाबाद के कोर्ट में। जहां एक बुजुर्ग रोने लगे तो ,राकेश कुमार सिंह जज साहब ने खुद के पैसे देकर उनका लोन चुकता किया। जज की दरियादिली तो देखिए उन्होंने अपने पैसे देकर उनका लोन चुकाया।

जहांनाबाद के कोर्ट में। जहां एक बुजुर्ग रोने लगे तो ,जज साहब ने खुद के पैसे देकर उनका लोन चुकता किया।
जहांनाबाद के कोर्ट में। जहां एक बुजुर्ग रोने लगे तो ,जज साहब ने खुद के पैसे देकर उनका लोन चुकता किया।

कहां की है यह घटना?

यह किस्सा जहानाबाद का है। जहां शनिवार के दिन अदालत में सुनवाई की गई। इस वक्त यहां के जज राकेश कुमार सिंह ने एक ऐसा कार्य किया। जिसने सभी का दिल जीत लिया। जब लोक अदालत में जज साहब बैठे, और सुनवाई जारी हुआ तो, उन्होंने ये सुना कि, एक गरीब बुजुर्ग ब्राह्मण ने कर्ज लिया था। ये कर्ज बैंक द्वारा लिया गया था। जो बेटी की शादी के लिए था। लेकिन गरीबी इतनी थी कि, उन्होंने कुछ समय तक ब्याज तो चुकाया। लेकिन बाद में वह भी नहीं चुका पाए। बुजुर्ग ने कहा उनके पास से ₹5000 हैं चाहे तो ले ले ।उसके पास इसके अलावा कुछ नहीं है। जज साहब दयालु इंसान है बुजुर्ग की ऐसी हालत देखी तो हमसे ना रहा गया उन्होंने बैंक वाले को बुलाया और खुद से उनका कर्ज चुकाया।

यह घटना लोगों को एक बहुत बड़ी सीख दे रही है। लोगों को यह सीख मिल रही है ,
यह घटना लोगों को एक बहुत बड़ी सीख दे रही है। लोगों को यह सीख मिल रही है ,

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 राकेश कुमार सिंह जज से मिली लोगों को सीख

यह घटना लोगों को एक बहुत बड़ी सीख दे रही है। लोगों को यह सीख मिल रही है ,कि भले बेटी की शादी क्यों ना करनी हो, लेकिन हमें कभी भी उतना कर्ज नहीं लेना चाहिए ,जितना हम चुका नहीं सकते ,और लड़के वालों को भी थोड़ा देखना चाहिए कि लड़की वाले कितना खर्च कर सकते हैं। उनको ज्यादा खर्च करने से मना करना चाहिए। अगर लड़के के घर वाले और लड़की के घर वाले, दोनों राजी खुशी होकर कम पैसे में शादी करना चाहे तो हो सकता है। शादी परिवारों का मिलन होता है ना कि पैसे बेफिजूल में उड़ाया जाए। शादी सही ढंग से भी हो सकता है ,शादी करने के लिए जरूरी नहीं है कि आप महंगे से महंगे होटल में जाएं, महंगा-महंगा खाना बनवाएं।आपसे जितना होता है उतना ही कीजिए। शादी तो खुशी का एक पल होता है जिसको जीना चाहिए ना कि कर्ज तले अपने आप को दबाना चाहिए। क्योंकि हमेशा जैसे judge साहब जैसे दरिया दिल इंसान हर जगह नहीं मिलते हैं।

 एक गरीब बुजुर्ग ब्राह्मण ने कर्ज लिया था। ये कर्ज बैंक द्वारा लिया गया था
एक गरीब बुजुर्ग ब्राह्मण ने कर्ज लिया था। ये कर्ज बैंक द्वारा लिया गया था

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