बचपन से ही कला का शौक था, लेकिन परिवार की इच्छा के लिए नौकरी चुनी, और दुबई से लाखो की नौकरी छोड़कर बना डाला ये अद्बुध घर, जिसमे कीड़े नहीं….

मनीषा एक इंजीनियर है। और उन्होंने अपने इस कला को बखूबी निखारा है।

करोना काल में किसी ने घर को खोया, तो किसी को अपने देश से दूसरे देश जाना पड़ा। दूसरे देश से लोग अपने देश वापस घर लौट आए ।जो कई सालों से भारत वापस नहीं आए थे, वह आज भारत में आकर रह रहे हैं। यहां की संस्कृति, और यहां के लोगों के बारे में जान रहे हैं ।ऐसा लोग मौका मिलने पर करते थे लेकिन करो ना काल में उन्हें आना ही पड़ा।करोना काल में इस सब को मजबूरन यहां आना पड़ा। लोग जहां शौक से आना पसंद करते थे ,वहां लोग अब मजबूरी में रह रहे हैं। लेकिन भारत एक ऐसा देश है ,जहां आने के बाद किसी को भी प्यार हो जाता है। तो यहां के लोग अपने ही भारत से कैसे दूर रह सकते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो भारत आग आए, और फिर यहीं पर बस गए ।उन्हीं में से आज हम आपको कहानी सुनाने जा रहे हैं। एक ऐसी ही महिला के बारे में, जिनका नाम मनीषा है। जो कि दुबई की रहने वाली है। यह पहले दूसरे देश में एक कॉरपोरेट कंपनी में काम करती थी ,और जब से वह कोरोना काल में भारत आई है, तब से वह भारत में ही रहने लगी हैं। मनीषा ठाकुर एक इंजीनियर है। और उन्होंने अपने इस कला को बखूबी निखारा है।

मनीषा ठाकुर, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहनेवाली हैं। कोरोना से पहले वह दुबई में कॉर्पोरेट कम्पनी में नौकरी करती थीं।
मनीषा ठाकुर, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहनेवाली हैं। कोरोना से पहले वह दुबई में कॉर्पोरेट कम्पनी में नौकरी करती थीं।

आइए जानते हैं मनीषा ठाकुर के बारे में

मनीषा ठाकुर, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहनेवाली हैं। कोरोना से पहले वह दुबई में कॉर्पोरेट कम्पनी में नौकरी करती थीं। मनीषा को कला का बहुत शौक था लेकिन पढ़ाई के कारण, और परिवार वालों के खुशी के लिए इन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर में जाने को चुना ।लेकिन जब कोरोना समय में मौका मिला तो इन्होंने घर बनाने का सोचा ।अपने कला को और भी निखारने का सोचा । मनीषा आज मिट्टी के घर बना रही है जो कि सीमेंट से बने हुए घर से कहीं ज्यादा मजबूत है। मनीषा इस कार्य को करोना काल से ही कर रही है ,और अपनी कलाकृतियों से देश की जो संस्कृति है ,उसको लोगों के सामने रख रही है।अब लोगों को सिर्फ घर ही नहीं बल्कि ,उन्हें अपनी संस्कृति से भी जुड़ने का मौका मिला है। आलिया लोगों को अपनी संस्कृति ,जो भारत की संस्कृति है ,उसे भी जोड़ रही है। और किस तरह आज मॉडर्न जमाने में जीने वाले लोग ,पुराने जमाने की तरह मिट्टी के घर में भी रह सकते हैं ।इसका एक उदाहरण पेश कर रही है ।कि मिट्टी के घर में रहना कितना ज्यादा फायदेमंद होता है। जो हमारे पर्यावरण के लिए भी बहुत ही ज्यादा लाभदायक साबित होगा।

मनीषा जो घर बना रही है ,घर बहुत ही खास और बहुत ही मजबूत है। इस घर में कभी भी कीड़े नहीं लगते
मनीषा जो घर बना रही है ,घर बहुत ही खास और बहुत ही मजबूत है। इस घर में कभी भी कीड़े नहीं लगते

आखिर क्या है खास आखिर क्या है खास इस घर में?

मनीषा जो घर बना रही है ,घर बहुत ही खास और बहुत ही मजबूत है। इस घर में कभी भी कीड़े नहीं लगते ।जबकि सीमेंट से बने घरों में कीड़े ,मकोड़े का कुछ ज्यादा ही डर रहता है ।लोग इससे बचने के लिए पेस्ट कंट्रोल करवाते हैं ,ताकि चूहे कॉकरोच और छिपकली वगैरह घर में ना आए। लेकिन मनीषा ऐसा घर बना रही है जिसके बाद जो भी इस घर में रहेगा उनको कभी भी ऐसे किसी भी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मनीषा ठाकुर, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहनेवाली हैं।
मनीषा ठाकुर, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला की रहनेवाली हैं।

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मिट्टी से ईंट बनाने के बारें में मनीषा बताती हैं कि इसे बनाने के लिए गुड़, गौमूत्र, गोबर, हरड़ और नीम के पानी समेत भूसा और चूना का इस्तेमाल किया जाता है। आप भी सोच सकते हैं, जब इन सब चीजों का इस्तेमाल करके ,कोई घर बनाएगा तो वह घर कितना मजबूत और साफ सुथरा रहेगा। यह घर बाहरी तापमान से कहीं ज्यादा ठंडा भी रहता है ।राजस्थान के रहने वाले लोगों के लिए ऐसा घर एक वरदान की तरह साबित होगा।

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