शराब की लत ने पति से जुदा कर दिया, पति की मौत के बाद भी नहीं मानी हार, बच्चो को सँभालते हुए बन गयी मिसाल, आज है एक सफल ट्रक ड्राइवर

बिहार से है प्रियंका शर्मा

किसी ने क्या खूब कहा है जिंदगी खेलती भी उसी के साथ है जो खिलाड़ी बेहतरीन होता है दर्द सब के एक से हैं मगर हौसले सब के अलग-अलग है कोई हताश होकर बिखर जाता है तो कोई संघर्ष करके निखर जाता है। ऐसी ही एक महिला के जीवन के बारे में बताएंगे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करके अपने मंजिल को पाया और आज वह यूपी रोडवेज की पहली महिला बस ड्राइवर है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी यूपीएसआरटीसी के द्वारा बस ड्राइवरों की भर्तियां की गई जिसमें 26 महिलाओं का चयन किया गया उन्हीं में से एक महिला ड्राइवर का नाम प्रियंका शर्मा है ‌।

प्रियंका शर्मा बिहार के बांका जिले के हरदौली गांव में रहने वाली हैं।
प्रियंका शर्मा बिहार के बांका जिले के हरदौली गांव में रहने वाली हैं।

बिहार से है प्रियंका शर्मा

प्रियंका शर्मा बिहार के बांका जिले के हरदौली गांव में रहने वाली हैं। उनकी शादी साल 2002 में विवेक से हुई थी। प्रियंका के पति को शराब की लत लगी हुई थी,इसकी वजह से उसको एक गंभीर बीमारी हो गया। और उसके इलाज के लिए प्रियंका ने भरसक अपनी पूरी कोशिश की। अपने गहने भी बेच दिए। जितना हो सका उसने किया लेकिन फिर भी वह अपने पति को नहीं बचा पाई। अब प्रियंका के पास कुछ नहीं बचा था उसको अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर कोई नौकरी करनी पड़ती। दोनों बच्चों की जिम्मेदारी और प्रियंका को इन सब का ख्याल रखना था। इसके लिए उनको रोजगार की जरूरत थी, जिसके लिए वह दिल्ली आ गई।

प्रियंका ने दिल्ली में उन्होंने ₹15000 मासिक वेतन पर एक नौकरी की।
प्रियंका ने दिल्ली में उन्होंने ₹15000 मासिक वेतन पर एक नौकरी की।

नौकरी भी की प्रियंका ने

दिल्ली में उन्होंने ₹15000 मासिक वेतन पर एक नौकरी की। पर इसे भी उनका घर का खर्चा नहीं चल पा रहा था। वह अपने परिवार का गुज़ारा सही से नहीं कर पा रही थी, इसके बाद उसने फैसला किया कि वह ट्रक चलाएंगी। चलाने के लिए उन्होंने बतौर एक हेल्पर की तरह काम किया और उसके बाद खुद एक ट्रक ड्राइवर बन गई। उनके इस काम से उनके परिवार के लोग संतुष्ट नहीं थे।

प्रियंका बन गयी ट्रक ड्राइवर
प्रियंका बन गयी ट्रक ड्राइवर

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बन गयी ट्रक ड्राइवर

जब यूपीएसआरटीसी के द्वारा ड्राइवर की भर्ती आई, तो प्रियंका के लिए खुशी का पल था। और जब उसमें उनका नाम चयन हुआ तो वह खुशी से फूली नहीं समाई। को काम के सिलसिले में कई बार बाहर जाना पड़ता था जिसकी वजह से वह अपने बच्चों का ख्याल नहीं रख पाती थी। इसलिए उन्होंने अपने दोनों बेटों को भागलपुर में स्थित सेंट कोलंबस स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेज दिया। प्रियंका का सपना है कि उनके बच्चे खूब पढ़े लिखे और एक अच्छे इंसान बने और खूब तरक्की करें। आज प्रियंका जैसी महिलाये देश के समाज की हर तबके की महिलाओ के लिए एक उदाहरण है।

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