ऐसी प्रधानाचार्य नहीं देखी होगी आपने, आते ही बदल दी अपने स्कूल की काया, तीन साल की मेहनत के बाद सरकारी स्कूल बना दिया प्राइवेट जैसा

सरकारी स्कूल को बना दिया प्राइवेट से भी बेहतर

हर स्कूल में आपने सुना होगा, एक उच्च पद प्रधानाचार्य का होता है। जिसके ऊपर सारे स्कूल की जिम्मेदारी होती है। और सारी देखरेख वही करते है। क्योकि ये बात बिलकुल सही है। और किसी भी स्कूल या विद्यालयो का विकास उसके शिक्षकों और प्रधानाचार्यो के ऊपर ही निर्भर करता है। वे चाहे तो हर संभव प्रयास से ही स्कूल में बदलाव ला सकते है। और फिर चाहे बहुत कुछ नए बदलाव कर सकते है। और एक प्रेरणा भी बन सकते है। आज की कहानी एक ऐसे प्रधानाचार्या की, जिन्होंने साढ़े तीन साल की लगातार मेहनत से एक खण्डहर पड़े स्कूल को एक आदर्श विद्यालय में बदल दिया है। और आज उस विद्यालय में कई छात्र आते है। और ये सभी के लिए प्रेरणा की बात है। और आज के इस लेख में के बारे में बात करने वाले है , उनका नाम है रघुवीर कौर जी, जिन्होंने प्रधानाचार्या बनने के बाद बहुत से बदलाव किये है। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद स्कूल की हालत बदल गयी है। आईये जानते है इनकी इस काहनी के बारे में।

सरकारी स्कूल को बना दिया प्राइवेट से भी बेहतर
सरकारी स्कूल को बना दिया प्राइवेट से भी बेहतर

सरकारी स्कूल को बना दिया प्राइवेट से भी बेहतर

साल 2015 में जब रघुवीर कौर principle बनकर आईं थी, तो तब से उन्होंने इसमें बेहतरीन बदलाव करने शुरू करने किये थे। जिसके बाद से ही इस विद्यालय की काया पलट होने लग गयी थी। और कुछ ही सालो में ये विद्यालय जो किसी खंडहर जैसा था, वो बदलकर एक सुंदर से प्राइवेट और सुविधाओं से लेस था। और आज वो स्कूल सभी के लिए एक प्रेरणा है। और कई लोग उनका ये बदलाव देखकर सभी लोगो के लिए हैरानी भरा था। क्योकि ये बहुत अलग बात है, कि कोई सरकारी स्कूल की काया पलट इस तरह से किया गया हो।

ये स्कूल आज एक आदर्श विद्यालय के रूप में स्थापित हो चुका है।
ये स्कूल आज एक आदर्श विद्यालय के रूप में स्थापित हो चुका है।

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प्रधानाचार्या छुट्टियों में भी किया काम

बता दे कि, स्कूल के सारे स्टाफ ने गर्मियों की छुट्टी में आकर काम किया हुआ है। और इसी का परिणाम है, कि ये स्कूल आज एक आदर्श विद्यालय के रूप में स्थापित हो चुका है। और ये उनकी ही मेहनत का परिणाम है, कि उन्हें सफलता मिल गयी है।

तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद स्कूल की हालत बदल गयी है।
तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद स्कूल की हालत बदल गयी है।

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