दूसरे विश्व युद्ध के समय से ले रहे है पेंशन, देश सेवा में बोयतराम जी ने गुज़ारे कई वर्ष, और वो पेंशन 19 रुपए से हो गयी है 35 हज़ार रुपए, बनाया रिकॉर्ड

राजस्थान से है बोयतराम डूडी

सरकारी नौकरी आज लगभग हर किसी का सपना है। और इसका मुख्य कारण है, इसमें मिलने वाली सिक्योरिटी। क्योकि सरकारी नौकरी में नौकरी के दौरान जो लाभ मिलते है। और नौकरी के बाद जो लाभ है, उनका भी कोई जवाब नहीं है ,. क्योकि इसमें नौकरी पूरी होने के बाद भी बहुत सी सुविधाये मिलती है। जिसमे कि इसमें नौकरी के पुरे होने के बाद भी पेंशन भी मिलती है। जिसमे कि बुढ़ापे के चिंता नहीं होती है। और आराम से बाद का जीवन गुज़ारा जा सकता है। और सही भी है। इतनी सुविधाए मिलना अपने आप में भी ही बहुत बड़ी बात होती है। और आज हम एक ऐसे पेंशन भोगी व्यक्ति की चर्चा यहाँ करने वाले है। जिनहोने अपनी ज़िंदगी का एक बहुत बड़ा समय भारतीय आर्मी में रहकर देश की सेवा की है। और उनका नाम है बोयतराम डूडी जी। जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान से ही देश की सुरक्षा की कमान अपने हाथो में संभाली हुई है। जो कि वाकई में ही बहुत सम्मानजनक बात है। क्योकि वे 64 साल से इसके लिए पेंशन भी ले रहे है। और उन्हें शुरुआत में ही 19 रुपए मिलती थी। जो कि अब बढ़कर 35 हज़ार रुपए हो गयी है ,और उन्होंने एक रिकॉर्ड ही बना दिया है।

 बोयतराम डूडी जी शुरुआत में ही 19 रुपए मिलती थी।
बोयतराम डूडी जी शुरुआत में ही 19 रुपए मिलती थी।

राजस्थान से है बोयतराम डूडी

बता दे कि, बोयतराम डूडी जी राजस्थान के झुंझुनू गाँव के रहने वाल है। और उन्होंने बहुत समय तक दूसरे विश्व युद्ध में देश की तरफ इंडियन आर्मी का नेतृत्व किया है। और उन्हें करीब 64 साल से पेंशन भी मिल रही है। और उनकी वर्तमान उम्र 98 साल की है। और उन्होंने उन्होंने एक रिकॉर्ड बना दिया है। इनका जन्म झुंझुनू गाँव के भोड़की में 21 जुलाई 1923 को हुआ था।

बोयतराम डूडी ने बहुत समय तक दूसरे विश्व युद्ध में देश की तरफ इंडियन आर्मी का नेतृत्व किया है।
बोयतराम डूडी ने बहुत समय तक दूसरे विश्व युद्ध में देश की तरफ इंडियन आर्मी का नेतृत्व किया है।

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महात्मा गाँधी और नेहरू से भी की है मुलाकात

दूसरे विश्व से लौटने बाद बोयतराम जी से महात्मा गाँधी और नेहरू जी से उनकी मुलकात हुई थी। बता दे कि इस युद्ध में बोयतराम डूडी की बटालियन के 80 फीसदी सैनिक शहीद हो गए थे। और उनकी शहादद याद की जाती रहेगी।

इस युद्ध में बोयतराम डूडी की बटालियन के 80 फीसदी सैनिक शहीद हो गए थे।
इस युद्ध में बोयतराम डूडी की बटालियन के 80 फीसदी सैनिक शहीद हो गए थे।

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