Kejriwal Swarnkanta – अरविंद केजरीवाल और न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के बीच झगड़ा दिल्ली शराब नीति से जुड़े मामले में है। उनका कहना है कि न्यायमूर्ति शर्मा की अदालत में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की आशा नहीं रही, ऐसे में पेश न होना और वकील न भेजना उनका फैसला था। इस कदम को उन्होंने गांधी के ‘सत्याग्रह’ के साथ जोड़ा, साथ ही कहा कि परिणामों को झेलने के लिए वे तैयार हैं। फिर भी, न्यायमूर्ति शर्मा ने अपने खिलाफ छुटकारा पाने की याचिका ठुकरा दी, कहा कि बिना मजबूत वजह के न्यायाधीश को मामले से हटाया नहीं जा सकता
Kejriwal Swarnkanta विवाद क्या है पूरी टाइमलाइन?
टकराव शुरू हुआ जैसे ही अरविंद केजरीवाल तक स्वर्णकांता का नाम पहुंचा। कई फैसलों पर सवाल उठे, इसके बाद राजनीति में हलचल दिखी। एक के बाद एक आरोप सामने आए, उनके जवाब में और तीखे ठहराव आए। कुछ आम आदमी पार्टी के नेता ने कार्रवाई पर संदेह जताया, तभी न्यायपालिका की गरिमा को लेकर बहस छिड़ गई। घंटों में ही माहौल तनावपूर्ण हो गया, तमाम वकीलों ने सुनवाई से दूरी बना ली
- 13 अप्रैल 2026: रिक्यूजल याचिका पर सुनवाई हुई।
- 20 अप्रैल 2026: जस्टिस शर्मा ने याचिका खारिज की।
- बाद में केजरीवाल की कोर्ट बहस का वीडियो विवाद में आया।

आरोप, दलीलें और बायकॉट क्यों हुआ?
थोड़ी देर बाद कई ऐलानों को लेकर हंगामा शुरू हो गया। कहीं-कहीं यह शिकायत सुनाई दी कि काम में गड़बड़ है, मगर कई लोगों ने इसे झटके में नकार दिया। उधर, कुछ वकील और साधारण आदमी नाराज होकर काम छोडऩे लगे। इस तरह विरोध करना उनके लिए ठीक था
- केजरीवाल ने कहा कि वे जस्टिस शर्मा की अदालत में पेश नहीं होंगे।
- उन्होंने वकील न भेजने की बात भी कही।
- जस्टिस शर्मा ने कहा कि बिना डर के मामले का फैसला किया जाएगा।
- विवाद ने कानूनी लड़ाई को राजनीतिक और न्यायिक बहस में बदल दिया है।

