Kejriwal Sisodia Court Boycott – दिल्ली शराब घोटाले में एक अलग ही मोड़ आ गया है। मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में आगे कुछ भी नहीं रखने का फैसला किया। उन्होंने पत्र में लिखा – जज के ऊपर से संदेह अभी उठा नहीं है, यह बात साफ रहनी चाहिए। कोई वकील उनकी ओर से बहस नहीं करेगा। इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने भी ऐसा ही कदम उठाया था। अदालत की कार्यवाही में हिस्सा न लेने का उनका फैसला भी सामने आया। गांधीजी के सत्याग्रह का जिक्र दोनों ने किया है न्याय के बारे में उनका भरोसा डगमगा चुका है, यह भी कहा गया
सिसोदिया ने पत्र में क्या लिखा है?
अपने खत में सिसोदिया ने कहा कि कोर्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं हो पाएंगे। वजह? सुनवाई के ढंग से उन्हें ऐतराज़ है। यही कारण है कि इस फैसले पर पहुंचे। पहले भी अपनी बात रख चुके हैं, अब इस तरह विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। ध्यान खींचना चाहते हैं
- कोर्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं होने की बात कही
- सुनवाई के तरीके पर आपत्ति जताई
- फैसले के पीछे अपने कारण बताए
- पहले ही अपनी बात रखने की बात कही

शराब नीति केस विवाद क्यों बढ़ा Kejriwal Sisodia
एक शराब नीति के आसपास विवाद तब भड़क उठा जब सवाल खड़े हुए कि यह नियम कैसे तैयार हुआ। इसके डिजाइन और अमल में ऐसी चीजें दिखीं जो सही नहीं लगीं। कई का दावा है कि कुछ खास लोगों के लिए नियम ढीले कर दिए गए। उचित प्रक्रिया के बजाय छल-कपट की बू आई
अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया का बड़ा फैसला, चिट्ठी में लिखा 'और कोई रास्ता नहीं बचा है
- नीति लागू करने के तरीके पर सवाल उठे
- कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के आरोप
- नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई
- जांच एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं
- मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है
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