Jemimah Rodrigues – हाल में जेमिमा रॉड्रिग्स ने महिला खेलों में पीरियड्स को लेकर चली आ रही शर्म और पुरानी सोच पर बात की। इस बारे में खुलकर बोलना अब भी कई क्रिकेटरों के लिए मुश्किल है, ऐसा उन्होंने कहा। एक प्राकृतिक घटना है यह, कमजोरी नहीं, इसे स्वीकार करना जरूरी है, उनका मानना है। खेल के ड्रेसिंग रूम में इस पर चुप्पी रखना कभी-कभी खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को धीमा कर देती है। उनके शब्दों ने महिला क्रिकेट में एक गहरी चर्चा छेड़ दी। अब सोच बदलने की जरूरत है, यह बात साफ हो गई है।
क्रिकेट में पीरियड्स पर खुलकर बोली Jemimah Rodrigues
खेल जैसे क्रिकेट में, महिलाओं के मासिक धर्म को लेकर अभी भी बहुत सारी आशंकाएं घूम रही हैं। ऐसे में जेमिमा ने कहा – खिलाड़ियों को अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए, वैसे ही जैसे बारिश में छतरी मिल जाती है।
- कुछ इलाकों में माहवारी पर बात करना आज भी गलत समझा जाता है
- हर बार जब मौका आता है, उनकी आवाज़ थोड़ी धीमी पड़ जाती है
- अब तक कई प्रशिक्षकों को समझ नहीं आया है। सहायक दल में भी बात फैली नहीं
- ग़लत असर के कारण प्रदर्शनों की सच्चाई छिप जाती है
- तनाव कई बार अचानक बढ़ जाता है

खिलाड़ियों को पीरियड्स के दौरान होने वाली चुनौतियाँ
लड़ाकू खेल में घटनाएँ जब आती हैं, तो कई महिलाओं को अपने शरीर और दिमाग के साथ झगड़ना पड़ता है। इस बीच, जब कोई सहयोग नजदीक नहीं होता, तो मैदान पर उनका खेल धुंधला सा पड़ सकता है।
- शारीरिक दर्द और थकान का असर
- हर दिन ट्रेनिंग करना कई बार मुश्किल हो जाता है
- कभी-कभी खेलते समय परेशानी होना
- तनाव के साथ-साथ हिचकिचाहट भी
- बहुत बार मदद नहीं मिल पाती

Jemimah Rodrigues से बदली क्रिकेट की सोच
खेलों की दुनिया में आजकल हलचल महसूस हो रही है। इस बात पर अब खिलाड़ी भी बोल रहे हैं, विश्लेषण भी नए ढंग से हो रहे हैं।
- लोगों में समझ फैलाने की कोशिशें धीरे-धीरे तेज हो रही है।
- अब खेलों में महिलाएँ धीरे-धीरे अपनी बात कह पा रही हैं।
- अब सहायता प्रणाली के ढांचे में बदलाव आ रहा है।
- बातचीत के दरवाजे धीरे-धीरे खुलने लगे हैं।
- इधर कुछ समय से मन की बातों पर बात होने लगी है।
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