असरानी को इस निर्देशक नेकहा कि तुम ‘न हीरो लगते हो न विलेन’ ये कहकर रिजेक्ट कर दिया और आज बन गए महशूर एक्टर

असरानी को इस निर्देशक नेकहा कि तुम 'न हीरो लगते हो न विलेन’ ये कहकर रिजेक्ट कर दिया और आज बन गए महशूर एक्टर

असरानी करीब 5 दशकों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। उन्हें हास्य के साथ-साथ गंभीर और सजीदा रोल भी किए है।उन्होंने 1972 और 1994 के बीच कई फिल्मों में मुख्य नायक के करीबी दोस्त के रूप में सहायक अभिनेता की भी भूमिका निभाई। कुछ हिंदी फिल्मों जैसे चला मुरारी हीरो बनने और सलाम मेमसाब में, उन्होंने बतौर मुख्य अभिनेता भी काम किया। उन्होंने गुजराती फिल्मों में भी मुख्य नायक की भूमिका निभाई।असरानी ने अभिनय के अलावा कई फिल्मों का निर्देशन भी किया।असरानी का पूरा नाम गोवर्धन असरानी है. उन्होंने 350 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में अभिनय किया है। हालांकि उन्होंने इतनी फिल्में कीं लेकिन शोले में जेलर के रूप में उनकी भूमिका को आज भी याद किया जाता है।उन्होंने राजेश खन्ना के साथ 25 फिल्मों में काम किया।

हिटलर अपनी आवाज के इस घुमाव से पूरे देश को हिप्नोटाइज कर देता
हिटलर अपनी आवाज के इस घुमाव से पूरे देश को हिप्नोटाइज कर देता

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‘न हीरो लगते हो न विलेन’ कहकर रिजेक्ट कर दिया था असरानी को

70 के दशक की शुरुआत होते-होते मायानगरी में राजेश खन्ना का रुतबा कम होने लगा था। उनकी एक के बाद एक फिल्में पिट रही थीं, तो दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन का कद बड़ा हो रहा था। अमिताभ को लेकर और भी कई ऐसी बातें थी जो डायरेक्टर-प्रोड्यूसर्स को पसंद आती थीं।

असरानी ने फिल्म "शोले' में अपनी चर्चित भूमिका अंग्रेजों के जमाने का जेलर' के लिए बड़ी तैयारी की
असरानी ने फिल्म “शोले’ में अपनी चर्चित भूमिका अंग्रेजों के जमाने का जेलर’ के लिए बड़ी तैयारी की

मसलन अमिताभ टाइम के बिल्कुल पंक्चुअल थे। शूटिंग के कॉल टाइम से 2 मिनट पहले ही सेट पर पहुंच जाते थे। विनम्र थे और सुपरस्टार जैसे नखरे नहीं थे। दूसरी तरफ राजेश खन्ना शूटिंग पर देरी से आने के लिए बदनाम थे। यहां तक कि वे कई बार अचानक शूटिंग रद्द कर देते।

‘न हीरो लगते हो न विलेन’ कहकर रिजेक्ट कर दिया था असरानी को
‘न हीरो लगते हो न विलेन’ कहकर रिजेक्ट कर दिया था असरानी को

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रिजेक्ट कर दिया था असरानी को इस निर्देशक ने

असरानी ने फिल्म “शोले’ में अपनी चर्चित भूमिका अंग्रेजों के जमाने का जेलर’ के लिए बड़ी तैयारी की थी। उन्हें सलीम-जावेद ने एक पुस्तक लाकर दी-“वर्ल्ड वॉर सेकेंड’ जिसमें अडोल्फ हिटलर की तस्वीरें थीं। उन्हें वैसा ही लुक बनाने के लिए कहा गया। कॉस्ट्यूम तैयार करने के लिए अकबर गब्बाना और विग बनाने वाले कबीर को बुलाया गया। पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट में हिटलर की रिकॉर्डेड आवाज थी, जो छात्रों को ट्रेनिंग देने के काम आती थी।

रिजेक्ट कर दिया था असरानी को इस निर्देशक ने , फिर ऐसे बने स्टार
रिजेक्ट कर दिया था असरानी को इस निर्देशक ने , फिर ऐसे बने स्टार

इसमें हिटलर जिस अंदाज में कहता है-“आई एम आर्यन।’ ठीक उसी अंदाज में असरानी ने डायलॉग बोला-“हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं।’ बाद में “हा हा’ भी इसमें वैसे ही आता था। हिटलर अपनी आवाज के इस घुमाव से पूरे देश को हिप्नोटाइज कर देता था।हमारे इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए आप सबका धन्यवाद और इस प्रकार की ओर भी रोचक खबरे जानने के लिए हमारी वेबसाइड Samchar buddy.com  जुड़े रहे हैं।

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