दीप्ति नवल जो एक फिल्म में डिटरजेंट बेचने वाली ‘मिस चमको’ का रोल कर के मशहूर हो गई

दीप्ति नवल की ‘चमको’ डिटर्जेंट पाउडर से चमकी थी किस्मत ,एक्टिंग में नहीं किया था कोई कोर्स

दीप्ति नवल एक्टिंग का कोई कोर्स किए बिना ही इंडस्ट्री में आई थीं। उन्होंने 1978 में आई अपनी पहली फिल्म जुनून से लेकर2 साल पहले अमरीकी फिल्म लॉयन तक करीब 70 फिल्मों में अभिनय किया। इनमें से कुछ फिल्में उनके दिल के बेहद करीब हैं। जिनमें “अनकही, ‘मैं ज़िंदा हूं’, ‘लीला’ और ‘मेमोरीज इन मार्च’ शामिल है।अभिनेत्री दीप्ति नवल की फारुख शेख के साथ 1981 में आई फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ ने उन्हें एक बड़ी अदाकारा के रूप में स्थापित किया। दीप्ति आज अपना 67वां जन्मदिन मना रही हैं। दीप्ति की पहचान हमेशा एक नान-ग्लैमरस, ऑर्ट फिल्मों की हीरोइन के रूप में ही रही है। ऐसा नहीं था कि उनकी फिल्में सफल नहीं हुईं लेकिन उन्होंने चमक-दमक वाली फिल्मों से जान-बूझकर दूरी बनाए रखी।फ़िल्म ‘चश्मे बद्दूर’  इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका में फ़ारुख़ शेख, राकेश बेदी, रवि बसवानी नज़र आए थे।

‘चमको’ डिटर्जेंट पाउडर से चमकी थी किस्मत
‘चमको’ डिटर्जेंट पाउडर से चमकी थी किस्मत

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दीप्ति नवल ‘चमको’ डिटर्जेंट पाउडर से चमकी थी किस्मत

इस सीन में सिद्धार्थ पराशर (फ़ारुख़ शेख़) ने चेहरे पर शेविंग क्रीम लगा रखी है और उनके कंधों पर तौलिया है. तभी दरवाज़े पर दस्तक होती है और जब कोई और दरवाज़ा नहीं खोलता तब चिढ़कर सिद्धार्थ दरवाज़ा खोलता है और सामने साड़ी पहने, करीने से बाल बांधे, हाथ में फ़ाइल और कंधे पर बैग लिए खड़ी है एक एक्ट्रेस.

मिस चमको का किरदार निभाया
मिस चमको का किरदार निभाया

सीन में आगे पता चलता है कि एक्ट्रेस साबुन बेचने वाली सेल्सगर्ल है। दोनों के बीच बात-चीत होती है और जब सिद्धार्थ सेल्सगर्ल को डेमो दिखाए बिना ही फ़ाइल में नाम लिखने को कहता है तब वो वापस लौटने लगती है। सीढ़ियों पर जा रही सेल्सगर्ल को सिद्धार्थ आवाज़ देकर कहता है, दीप्ति नवल ने’मिस चमको’ मिस चमको का किरदार निभाया है।

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नहीं किया था एक्टिंग में कोई कोर्स

दीप्ति नवल कहती हैं, ”उस जमाने में मुझे हर तरह की फिल्में ऑफर हुईं, कॉमर्शियल, बी-ग्रेड और अच्छी फिल्में भी लेकिन मुझे उन फिल्मों का माहौल नहीं पसंद आया। मैंने तय किया कि मैं ऑर्ट फिल्में ही करूंगी वही मुझे सूट भी करता था।दरवाजे पर घंटी बजती है।

आज भी 'चश्मे बद्दूर' की अभिनेत्री के तौर पर बेहतर
आज भी ‘चश्मे बद्दूर’ की अभिनेत्री के तौर पर बेहतर

खोलने पर सामने एक सेल्स गर्ल हाथ में चमको नाम का डिटर्जेंट पाउडर का डिब्बा लिए खड़ी थी। लड़की का नाम, फ़िल्मी पर्दे पर नेहा राजन और असल ज़िंदगी में दीप्ति नवल। दीप्ति मानती हैं कि उन्हें आज भी ‘चश्मे बद्दूर’ की अभिनेत्री के तौर पर बेहतर जाना जाता है।

 दीप्ति एक्टिंग का कोई कोर्स किए बिना ही इंडस्ट्री
दीप्ति एक्टिंग का कोई कोर्स किए बिना ही इंडस्ट्री

दीप्ति एक्टिंग का कोई कोर्स किए बिना ही इंडस्ट्री में आई थीं। उन्होंने 1978 में आई अपनी पहली फिल्म जुनून से लेकर2 साल पहले अमरीकी फिल्म लॉयन तक करीब 70 फिल्मों में अभिनय किया। इनमें से कुछ फिल्में उनके दिल के बेहद करीब हैं। जिनमें “अनकही, ‘मैं ज़िंदा हूं’, ‘लीला’ और ‘मेमोरीज इन मार्च’ शामिल है।हमारे इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए आप सबका धन्यवाद और इस प्रकार की ओर भी रोचक खबरे जानने के लिए हमारी वेबसाइड Samchar buddy.जुड़े रहे हैं।

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