अद्बुध है ये मंदिर, इस अनोखे शिव मंदिर में छिपा है दुनिया के खत्म होने का रहस्य, अगर ये द्वार खुला हो जायेगी दुनिया?

पिथौरागढ़ जिले में पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर स्थित है

उत्तराखंड को देव भूमि कहा जाता है। क्योकि यहाँ पर मान्यता के अनुसार देवो का वास माना गया है। और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार हर मंन्दिर की कुछ न कुछ अपनी विशेषता है। और आज हम एक ऐसे ही अनोखे और विशेष मंदिर के बारे में जानेंगे। जिसके बारे में ऐसा कहा जाता है, कि उस मंदिर में दुनिया के खत्म खत्म होने का राज़ है। और इस मंदिर का नाम है भुवनेश्वर का पाताल मंदिर। जो कि अनंत रहस्यों से भरा हुआ है। और इसमें एक ऐसा द्वारा है, जिससे कि दुनिया की खत्म होने की बात कही जाती है। वैसे हमारा उत्तराखंड अनोखे रहस्यों से भरा हुआ है। इस मंदिर में एक शिवलिंग विराजित है। माना जाता है कि, यहां पर 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं। जो कि बहुत खास बात है , आईये इस मंदिर के बारे में जानते है।

पिथौरागढ में स्तिथ है ये अनोखा मंदिर
पिथौरागढ में स्तिथ है ये अनोखा मंदिर

पिथौरागढ में स्तिथ है ये अनोखा मंदिर

बता दे कि, ये अनोखा मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित है। और अनोखे रहस्यों से भरा हुआ है। और मानयता के अनुसार इसमें स्तिथ गुफा में पाताल का रास्ता है। और दुनिया का खत्म होने की बात तक कही जाती है। और ये बात आज तक रहस्य ही बनी हुयी है।

शानदार है अनोखी गुफा
शानदार है अनोखी गुफा

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शानदार है अनोखी गुफा

सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात है पाताल भुवनेश्वर की गुफा की  क्योकि ये जितनी प्राकृतिक ढंग से निर्मित हुई हुई है , और यही सबसे ख़ास बात है ,. और उस गुफा में एक प्राकृतिक शिवलिंग भी बना हुआ है। जो कि देखने में भी बहुत ख़ास है। और सूंदर भी है। हर साल कई हज़ारो की तादाद में दर्शन के लिए आते है। और मान्यता के अनुसार ऐसा भी कहा जाता है, कि, यहाँ पर करीब 33 करोड़ देवी देवताओं का वास भी माना जाता है। और इस गुफा में आगे जाकर चार द्वार मौजूद द्वार, पाप द्वार, धर्म द्वार और मोक्ष द्वार है।

पाताल भुवनेश्वर की गुफा प्राकृतिक ढंग से निर्मित हुई हुई है ,
पाताल भुवनेश्वर की गुफा प्राकृतिक ढंग से निर्मित हुई हुई है ,

इस मंदिर की खोज त्रेता युग में इस गुफा की खोल राजा ऋतुपर्ण ने की थी। इसके बाद दोबारा इस गुफा की खोल पांडवों से की थी। वहीं स्कंद पुराण के साथ पहली बार 819 ई में आदि गुरु शंकराचार्य ने इस गुफा की खोज की थी

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