Raja Ravi Varma –राजा रवि वर्मा की यह 19 वी शदी की पेंटिंग अब तक की सबसे महेंगी भारतीय कलाकृति बन चुकी है। इसने अब तक का सबसे बड़ा और नया नीलामी रिकॉर्ड बना दिया है। सुनने में आया है की यह यशोदा और कृष्ण की पेंटिंग 167.2 करोड़ की बिकी है , डॉ .साइरस एस. पूनावाला ने यह पेंटिंग खरीदी. पेटिंग ने एक रिकॉर्ड भी बनाया. ऑक्शन में बिकने वाली मॉडर्न इंडियन आर्ट के लिए यह अब तक की सबसे ज्यादा कीमत पर बिकने वाली पेटिंग बन गई है।
Raja Ravi Varma कौन थे?
राजा रवि वर्मा का जन्म 29 April 1848 को केरल के एक छोटे से शहर किलिमानूर में एक क्षत्रिय परिवार में हुआ भारत के एक महान और विख्यात चित्रकार थे, जिन्हें “आधुनिक भारतीय कला का जनक” माना जाता है। उन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं (रामायण, महाभारत, पुराण) को यूरोपीय तैल चित्रण (ऑइल पेंटिंग ) तकनीक के साथ मिलाकर देवी-देवताओं और भारतीय पात्रों को जीवंत चित्रण दिया।
राजा रवि वर्मा प्रसिद्ध क्यों है?
यूरोपीय तेल चित्रकला तकनीकों को भारतीय पौराणिक विषयों के साथ मिश्रित करने के लिए उन्हें “आधुनिक भारतीय कला का जनक” माना जाता है। वे हिंदू देवी-देवताओं और महाभारत एवं रामायण के पात्रों के निशानी वाले , सच्चाई पर आधारित और दिल से जुड़े चित्रण के लिए प्रसिद्ध हैं, जिन्हें उन्होंने किफायती और बड़े पैमाने पर तैयार किया छापी गई चित्रकारी के माध्यम से आम जनता के लिए सुलभ बनाया।

हिंदू देवी-देवताओं के चित्र सबसे पहले किसने बनाए थे?
केरल के चित्रकार Raja Ravi Varma को हिंदू देवी-देवताओं के निशानी वाले , सच्चाई पर आधारित और दिल से जुड़े चित्र बनाने वाले पहले चित्रकार के रूप में व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है। उन्होंने यूरोपीय तेल चित्रकला तकनीकों को भारतीय प्रतिमा विज्ञान के साथ मिलाकर, देवी-देवताओं की तस्वीर दिखने को परिभाषित किया, जो आज भी पूजा में प्रचलित हैं, विशेष रूप से उनके किफायती तेल-छापी गई चित्रों के माध्यम से।
Raja Ravi Varma के कुछ प्रसिद्ध चित्र :
- शकुंतला : यह उनकी सबसे प्रतिष्ठित पेंटिंग है। इसमें दुष्यंत के विरह में शकुंतला को कांटा निकालने के बहाने पीछे मुड़कर देखते हुए रोमांटिक अंदाज़ में दिखाया गया है।
- द गैलेक्सी ऑफ म्यूजिशियन : इस चित्र में भारत के विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं को अलग-अलग पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाते हुए दिखाया गया है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
- हंस दमयंती : इस पेंटिंग में राजकुमारी दमयंती को एक हंस के साथ संवाद करते हुए दर्शाया गया है, जो उन्हें राजा नल का संदेश देता है। यह भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित एक बहुत बढ़िया रचना है।
- देयर कम्स पापा : यह पेंटिंग उनके मानवीय पक्ष को दिखाती है, जिसमें उनकी बेटी महाप्रभा को अपनी माँ की गोद में और सामने उनकी बहन को दिखाया गया है। यह एक निजी और प्यारभरा नजारा है।

Raja Ravi Varma ने कितनी पेंटिंग बनाई हैं?
प्रसिद्ध कला इतिहासकार और संरक्षण विशेषज्ञ रूपिका चावला के अनुसार, रवि वर्मा ने अपने जीवनकाल में 2,000 से अधिक कलाकृतियाँ बनाई थीं।
इनकी कुछ प्रसिद्ध चित्रकारी और उनकी तिथि:
| पेंटिंग का नाम | अनुमानित वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| शकुंतला (पत्र लेखन) | ~1898 | कालिदास के नाटक पर आधारित, दुष्यंत के लिए प्रेम पत्र लिखती हुई |
| राधा इन द मूनलाइट | ~1890 | चांदनी रात में राधा का चित्रण |
| जटायु वध | 19वीं सदी | रामायण का दृश्य, रावण द्वारा जटायु को घायल करना |
| श्री राम द्वारा समुद्र पर विजय | 19वीं सदी | समुद्र देवता वरुण के सामने क्रोधी राम |
पूछे गए प्रशन
- पेन्टिंग किस पर आधारित है ?
यशोदा और कृष्ण (1890 के दशक की पेंटिंग) - पेंटिंग नीलम होने का समय की था ?
1 अप्रैल 2026 - पेंटिंग किस नीलम घर में नीलम हुई ?
सैफ्रनआर्ट (Saffronart), मुंबई - पेंटिंग का सही मूल्य की था ?
167.20 करोड़ रुपये। - पेंटिंग का खरीदार कौन था ?
साइरस पूनावाला।
कृष्ण और यशोदा की छवि ने दक्षिण एशिया के कलाकारों को लंबे समय से प्रेरित किया है, जिन्होंने उन्हें गीतों, मंदिर की मूर्तियों और स्थानीय चित्रकला परंपराओं में चित्रित किया है। लेकिन कला इतिहासकारों के अनुसार, वर्मा ने उन्हें अधिक स्वाभाविक रूप में चित्रित किया।
यह आर्टिकल राजा रवि वर्मा की नीलामी में नीलम हुई पेंट क ऊपर था। ऐसे मजेदार और जानकारी से भरे आर्टिकल पढ़ने के लिए हमारी साइट samachar buddy पर विजिट करे।

