ऐसा क्यों हुआ कि जिंदगी की जंग हार गई गीता फोगाट की बहन,और दुप्पटे के फंदे से खत्म किया जीवन?

आखिर गीता फोगाट की बहन ने दुप्पटे के फंदे से खत्म क्यों किया रितिका ने

इंडिया की स्टार पहलवान गीता और बबीता फोगट  की ममेरी बहन रितिका फोगट  ने आत्महत्या कर ली। कहा जा रहा है कि, वह भरतपुर में हुए कुश्ती टूर्नामेंट का फाइनल मैच हार गई थी। जिसके बाद उन्होंने अपने फूफा महाबीर सिंह फोगाट और गीता-बबीता के मायके बलाली गांव में बने घर में फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। उसका अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव राजस्थान के झुंझुनूं जिले के जैतपुर में किया गया।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रितिका ने 12 मार्च से 14 मार्च के बीच राजस्थान के भरतपुर के लोहागढ़ स्टेडियम में स्टेट लेवल सब-जूनियर, जूनियर महिलाओं और पुरुषों की कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लिया था। 14 मार्च को खेले गए फाइनल में रितिका एक प्वाइंट से हार गई। बताया जाता है कि इस मुकाबले के दौरान वहां महाबीर फौगाट भी मौजूद थे। हार के बाद रितिका सदमे में चली गई और अपनी जिंदगी को ही खत्म कर लिया।

जिंदगी की जंग हार गई गीता फोगाट की बहन
जिंदगी की जंग हार गई गीता फोगाट की बहन

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जिंदगी की जंग हार गई गीता फोगाट की बहन

रितिका फोगाट भी अन्य पहलवानों की तरह गीता और बबीता के जैसे महान पहलवान बनने का सपना लेकर आई थी। इसके लिए 17 साल की रितिका अपने फूफा पहलवान महाबीर फौगाट की एकेडमी में पांच साल से ट्रेनिंग भी ले रही थी। बता दें कि दुनिया में महिला पहलवानों में फोगाट सिस्टर्स का डंका बजता है। गीता-बबीता ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में देश के लिए गोल्ड और रजत पदक जीता था।

गीता-बबीता ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में देश के लिए गोल्ड और रजत पदक जीता था।
गीता-बबीता ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में देश के लिए गोल्ड और रजत पदक जीता था।

इसके बाद गीता भारत की पहली महिला पहलवान बनी थीं, जिन्होंने CWG में गोल्ड मैडल जीता था। उनकी छोटी बहन रितु फोगट एक पेशेवर MMA (मिश्रित मार्शल आर्ट) फाइटर हैं। वहीं, उनकी चचेरी बहन विनेश फोगट दुनिया के टॉप फ्रीस्टाइल पहलवानों में से एक हैं। वे अब टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने की तैयारी कर रही है।इंडिया की स्टार पहलवान गीता और बबीता फोगट की ममेरी बहन रितिका फोगट ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह भरतपुर में हुए कुश्ती टूर्नामेंट का फाइनल मैच हार गई थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी जान ले ली।

 

हार ने रितिका को बुरी तरह से तोड़ कर रख दिया था और अंत में उन्होंने खुद को खत्म करने का फैसला कर लिया था.
हार ने रितिका को बुरी तरह से तोड़ कर रख दिया था और अंत में उन्होंने खुद को खत्म करने का फैसला कर लिया था.

दुप्पटे के फंदे से खत्म किया जीवन

कुश्ती चैम्पियन गीता फोगाट और बबीता फोगाट को न जानता हो।जब घर में ऐसे ऐसे बड़े भाई बहन ऐसे होगे तो छोटे भी उनके नक़्शे कदम पर चलने के लिए प्रेरित होते है ।लेकिन सफलता एक दम से हासिल नही होती।जीवन में एक सफल चैम्पियन बनने के लिए कई बार हार का सामना करना पड़ता है।जिसमे आज हार बर्दाश्त करने की क्षमता है वही कल को अपनी हार को बड़ी जीत में बदल कर दुनिया में नाम रौशन करता है ।लेकिन हार सहन करना सबके बस कि बात नही।कुछ लोग छोटी छोटी बाते दिल पर लगा लेते है और इसके चलते गलत कदम उठाने पर मजबूर हो जाते है और अंत में अपना जीवन समाप्त कर लेते है।

गीता-बबीता की तरह बनाना चाहती थी रितिका
गीता-बबीता की तरह बनाना चाहती थी रितिका

दरअसल इसके लिए वो काफी मेहनत भी कर रही थी, हालाँकि करियर की शुरुआती कुश्ती यानी स्टेट लेवल सब जूनियर कॉम्पिटिशन में हार मिलने के बाद वो बुरी तरीके से निराश हो गई थी। वहीं मीडिया से प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह टूर्नामेंट 12 से 14 मार्च के दरमियान भागलपुर में संपन्न हुआ था।दरअसल इस कुश्ती कॉम्पिटिशन में रितिका फाइनल तक भी आ चुकी थी। मगर फाइनल मैच में वो सिर्फ एक नंबर से बाहर हो गई थी।वहीं इस हार ने रितिका को बुरी तरह से तोड़ कर रख दिया था और अंत में उन्होंने खुद को खत्म करने का फैसला कर लिया था।हमारे इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए आप सबका धन्यवाद और इस प्रकार की ओर भी रोचक खबरे जानने के लिए हमारी वेबसाइड Samchar buddy.com जुड़े रहे हैं।

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