Heart Disease Risk – नई गाइडलाइंस में एक कैलकुलेटर शामिल है, जिसका इस्तेमाल डॉक्टर यह पता लगाने के लिए कर सकते हैं कि किसी मरीज़ को अगले 10 या 30 सालों में दिल की बीमारी होने का कितना खतरा है। पहला कदम LDL कोलेस्ट्रॉल की रीडिंग देखना है, न कि HDL की—जिसे “अच्छा” कोलेस्ट्रॉल माना जाता है—या कुल कोलेस्ट्रॉल की, जिसमें सभी तरह के कोलेस्ट्रॉल एक ही माप में शामिल होते हैं। LDL, या लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को अक्सर “खराब कोलेस्ट्रॉल” कहा जाता है, क्योंकि जिन लोगों में इसका लेवल ज़्यादा होता है, उन्हें दिल की बीमारी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी ज़्यादा होता है।
Heart Disease Risk में LDL क्या होता है?
LDL – Low-Density Lipoprotein खुद खराब नहीं है; बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका शरीर इसके साथ क्या करता है। क्या आपका शरीर उन फैट्स को लेकर धमनियों में जमा कर देता है,
- LDL को ठीक से प्रोसेस कर पाता है
- दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है

कोलेस्ट्रॉल नया खतरा लेवल
डॉक्टरों ने हाल ही में कोलेस्ट्रॉल के उस स्तर को अपडेट किया है, जो दिल की बीमारियों के खतरे से जुड़ा माना जाता है। नए गाइडलाइन के अनुसार, पहले से कम स्तर पर भी जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए लोगों को समय-समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार पर ध्यान देना जरूरी है।
- अब लो-लेवल कोलेस्ट्रॉल भी जोखिम का संकेत हो सकता है
- नियमित लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना जरूरी
- जंक फूड और ट्रांस फैट से दूरी बनाएं
- धूम्रपान और शराब से बचें
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लें
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