मोहन भागवत सुरक्षा केस : कोर्ट ने किया सबसे बड़ा फैसला! जाने पूरी खबर

Mohan Bhagvat : भारत में बड़े नेताओं और मशहूर हस्तियों की सुरक्षा हमेशा चर्चा में रहती है हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरएसएस (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है दरअसल कोर्ट में एक अर्जी दी गई थी जिसमें कहा गया था कि मोहन भागवत की सुरक्षा पर जो करोड़ों रुपये खर्च होते हैं वह उन्हीं से वसूले जाने चाहिए लेकिन हाईकोर्ट ने इस मांग को पूरी तरह से ठुकरा दिया है अदालत ने कहा कि किसी को सुरक्षा देना सरकार का अपना फैसला होता है और इसे पैसों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए यह मामला आम जनता के बीच काफी चर्चा बटोर रहा है

मोहन भागवत की सुरक्षा पर क्या बोला कोर्ट?

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ कहा कि सुरक्षा एक जिम्मेदारी है और एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कोर्ट में याचिका डाली थी कि चूंकि आरएसएस एक निजी संस्था है इसलिए इसके प्रमुख की सुरक्षा का बोझ जनता पर नहीं पड़ना चाहिए याचिका में मांग थी कि सुरक्षा का बिल मोहन भागवत खुद भरें लेकिन जज साहब ने इस दलील को पूरी तरह नकार दिया कोर्ट ने समझाया कि सरकार किसी व्यक्ति के पद को देखकर नहीं बल्कि उसकी जान के खतरे को देखकर सुरक्षा देती है जो कि बिल्कुल सही प्रक्रिया है

Mohan Bhagvat
Mohan Bhagvat

भागवत केस कोर्ट ने याचिका पर क्यों उठाए सवाल?

हाईकोर्ट के जजों ने याचिका लगाने वाले व्यक्ति को जमकर फटकार लगाई और उसकी सोच पर सवाल उठाए कोर्ट ने पूछा कि क्या यह केस वाकई लोगों की भलाई के लिए है या सिर्फ सस्ती लोकप्रियता पाने का एक तरीका है अदालत का मानना था कि सुरक्षा जैसे गंभीर मामले में इस तरह की याचिकाएं सिर्फ अदालत का समय बर्बाद करती हैं कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सरकार को लगता है कि किसी व्यक्ति की जान को खतरा है तो उसकी रक्षा करना राज्य का धर्म है और बिना किसी ठोस कानूनी सबूत के ऐसी मांगों को स्वीकार नहीं किया जा सकता

क्यों और कैसे मिलती है Z+ सुरक्षा?

भारत में सुरक्षा देने का फैसला खुफिया विभाग की सीक्रेट रिपोर्ट के आधार पर लिया जाता है मोहन भागवत को जेड प्लस सुरक्षा मिली है जिसमें कमांडो तैनात रहते हैं याचिकाकर्ता ने इसे पैसों की बर्बादी बताया था लेकिन कानून की नजर में जान की कीमत सबसे ऊपर है कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कोई लग्जरी सुविधा नहीं है जिसे खरीदा या बेचा जा सके यह सरकार का अपना अधिकार है कि वह तय करे कि किसे कितनी सुरक्षा की जरूरत है इसलिए सुरक्षा खर्च की वसूली की बात कानूनी तौर पर कहीं टिकती ही नहीं है

खास बात आसान जवाब
कोर्ट का नाम बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर बेंच)
मुख्य मुद्दा सुरक्षा खर्च की वसूली
किसकी सुरक्षा? मोहन भागवत (RSS प्रमुख)
नतीजा क्या निकला? याचिका खारिज कर दी गई
सुरक्षा क्यों मिलती है? जान का खतरा होने पर
Mohan Bhagvat
Mohan Bhagvat

अक्सर पूंछे जाने वाले सवाल –

1. कोर्ट ने सुरक्षा के बारे में क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा देना सरकार की ड्यूटी है और इसका खर्च व्यक्ति से नहीं वसूला जा सकता।

2. याचिका लगाने वाले की क्या मांग थी?

याचिकाकर्ता चाहता था कि मोहन भागवत अपनी सुरक्षा का सारा खर्च खुद अपनी जेब से भरें।

3. क्या कोई भी सुरक्षा का खर्च खुद दे सकता है?

आमतौर पर सरकारी सुरक्षा फ्री होती है, सिर्फ विशेष प्राइवेट सुरक्षा के लिए पैसे लिए जाते हैं।

4. मोहन भागवत को कौन सी सुरक्षा मिली हुई है?

उन्हें Z+ सुरक्षा मिली है, जिसमें सीआईएसएफ (CISF) के जवान और कमांडो शामिल होते हैं।

इस पूरे फैसले का सीधा सा मतलब यह है कि देश के महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए पैसे मांगना गलत है बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था को वित्तीय लाभ या हानि के तराजू में नहीं तौला जा सकता है यह फैसला भविष्य के लिए एक बड़ा उदाहरण है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति या पैसों को बीच में नहीं लाना चाहिए इससे सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल भी बढ़ता है

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