Haryali Devi Yatra: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बसा हुआ जसोली गाँव जसिमे माँ हरियाली देवी की कांठा यात्रा एक बेहद अनूठी और प्राचीन परंपरा मणि जाती हे जो की दिवाली के धनतेरस की रात जसोली गाँव से शुरू होकर हरियाल पर्वत तक जाती है यह यात्रा हर साल श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है,इसके लिए हर भक्त पहले से तयारी करके आता हे पर एक अनोखी बात इसमें केवल पुरुष ही हिस्सा ले सकते हैं औरत शामिल नहीं हो सकती इस यात्रा का उद्देश्य न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत करना है, बल्कि एक अलग तरह के साहसिक अनुभव का भी हिस्सा बनना है जबकि इस यात्रा के बहुत सारि चुनौती हे वह हम आपको निचे बताएगे सब आओ देखो निचे
Haryali Devi Yatra-इतनी खास क्यों है?
यह यात्रा उत्तराखंड के सबसे खास यात्राओं में मानी जाती हे इस यात्रा क्यों इसमें बहुत सारि बातो का ध्यान देना पड़ता था जसिको हर कोई नहीं कर पता हे अब में आपको इस यात्रा के कुछ निचे ऐसा बात बताउगा जिसको आपको यत्र से 1 हप्ते पहले चूर्ण पड़ता हे दोस्तों वरना रस्ते में आपके साथ यात्रा को बंद करके वाली नौबत आ सकती हे अगर आप यह काम नई करोगे तोह पहले में आपको निचे बताउगा क्या क्या यात्रा से पहले करना पड़ता हे फिर नाह करोगे तोह क्या होगा
यात्रा से पहले की खास बाते
- आपको 1 हप्ते पहले प्याज़ और लसन त्यागना होगा
- आपको 2 हप्ते पहले दारू मांस त्यागना होगा
अगर आप यह सब नहीं करोगे तोह क्या होगा
- रात में यात्रा शुरू होती है आपको सब सई लगेगा पर आधे रस्ते में सास फूलना सुरु
- रास्ते में आपको सच में शेर मिल जाएगा जिसे आप डर के वापिस लौट जाओगे
- आपको आधे रस्ते बाद 2 रस्ते मिलेंगे आप भटक जाओगे

इस यात्रा में कौन भाग ले सकता है?
अब अगर में आपको यह बात बोलूंगा की इसमें पुरुषों भाग ले सकते हे आप बोलोगे यह कैसी बात हे पर दोस्तों में खुद इस यात्रा में शामिल हुआ था यह बात सई हे की महिलाएं इस यात्रा का हिस्सा नहीं बन सकतीं, जिससे यह यात्रा एक तरह से पुरुषों के लिए विशेष धार्मिक अनुभव बन जाती है दोस्तों वैसे तोह यह बात को लेके चर्चा काफी हुए पर क्या करे हमारे परम्परा के हिसाब से एहि होता रहा हे और एहि होता रहेगा
यात्रा के मुख्य मार्ग और चुनौतियाँ
जब यह यात्रा सुरु होती हे तब जो भगत रेहता उसको बहुत सारि कठिन उची पर्वत से गुजरना पड़ता हे में आपको निचे इसका समय और क्या क्या जरुरी सामान हे उसके बारे में बताता हु दोस्तों आओ
| मार्ग | संसाधन | समय | चुनौतियाँ |
|---|---|---|---|
| पहला मार्ग | घने जंगल, पहाड़ | 4-5 घंटे | सर्दी, ऊबड़-खाबड़ रास्ते |
| दूसरा मार्ग | बर्फ, संकरी पगडंडी | 3-4 घंटे | बर्फबारी, तेज हवाएँ |
| तीसरा मार्ग | खड़ा पहाड़, ऊँचाई | 6-7 घंटे | शारीरिक थकावट, मानसिक दबाव |

अंत में यह यात्रा कहा जाती हे
यह यात्रा बहुत कठिन रास्तो के बाद सुबहे के 4 बजे ऊपर माता हरयाली मंदिर हे जिसका नाम कांठा नाम से जानते हे जब सूर्य उदय होता हे वैसे हे डोली ऊपर अति हे उसके बाद माँ के भगत माता को देख के लीन हो जाते यह माता की कृपा हे उनकी थकन माता को देख के संत हो जाती हे उसके बाद वह पर एक विशाल भंडारा आयोजित रहता हे फिर पूजा पाठ हवन करके माता का आवाहन होता हे दोस्तों उसके बाद यह यात्रा निचे गऊ की और प्रस्थान होती हे फिर माँ अपने भगतो को उनके घर पर जाके अशिर्बाद देती हे
यात्रा से जुड़े सवाल जवाब
क्या महिलाएं इस यात्रा में शामिल हो सकती हैं?
नहीं,
यात्रा में कितने घंटे लगते हैं?
4-7 घंटे
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