Childhood Obesity – एक दस साल के बच्चे का 47 किलो वजन होना शुरू में भारी लगे, पर असल में यह उसकी ऊंचाई, बनावट और आदतों पर टिका होता है। ऊपर से देखकर घबराने की जगह नहीं, क्योंकि हर बच्चा अलग ढंग से बढ़ता है। खेलता-भागता है , संतुलित खाना खाता हो, और लंबाई के मुताबिक वजन सही हो, तो कोई बड़ी बाधा नहीं। अचानक वजन बढ़ रहा हो, हिलना-डुलना कम हो गया हो, या थकावट या सांस लेने में दिक्कत झेल रहा हो – तो बात बचपन में मोटापे की ओर इशारा कर सकती है। इस तरफ ध्यान जरूरी है, वैसे नहीं तो छोड़ देना ठीक है।
Childhood Obesity क्या है?
बचपन में वजन तब चिंता की बात बन जाता है, जब लंबाई और उम्र के हिसाब से यह सामान्य से काफी ज्यादा हो। ऐसे में डॉक्टर इसे मोटापा मानते है । धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ सकती है, क्योंकि भविष्य में सेहत के मुद्दे आसानी से जुड़ जाते हैं।
मुख्य बातें:
- BMI से शरीर का मूल्यांकन मापा जाता है
- हर उम्र के बच्चे के लिए अलग होती है वजन-ऊंचाई सूची।
- इस समस्या का आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
- खाने-पीने की आदतें और दिनचर्या।
- पहचान का सही समय मिलना अक्सर फर्क डाल देता है।

47 किलो वजन कब चिंता का कारण बनता है?
दस साल के बच्चे का 47 किलो वजन होना कभी-कभी ठीक होता है, पर यह लंबाई पर टिका रहता है। बढ़ते समय का ढंग भी फैसला करता है कि यह सही है या नहीं। तेजी से वजन बढ़ने पर मुश्किल शुरू हो सकती है। खासकर अगर BMI सामान्य से ऊपर चला जाए। ऐसे वक्त डॉक्टर के पास जाना बेहतर लगता है।
ध्यान देने वाली बातें :
- कम कद होने पर शरीर का भार अधिक लगता है।
- थोड़ी देर में ही उसकी ताकत खत्म हो जाती है। कभी-कभी वह पूरे दिन सुस्तपन में डूबा रहता है।
- शरीर पर चर्बी का असर साफ़ नजर आता है। जबकि पेट में यह जमाव खास तौर पर दिखने लगता है।
- थोड़ा सा हिलना-डुलना होता है।
- मोटापा मापने के लिए चार्ट का इस्तेमाल डॉक्टर करते हैं।
बचपन के मोटापा का मुख्य कारण
अक्सर गलत आदतों के कारण बच्चों में मोटापा धीरे-धीरे घर करने लगता है। आजकल कई बच्चे ऐसे खाने पर रुक जाते हैं जिसमें फास्ट फूड, पैकवाले स्नैक्स या मीठे पदार्थ होते हैं। ऐसा खाना शरीर को ज्यादा कैलोरी तो देता है, पर पोषण कम देता है। उधर, खुले मैदान में खेलने के बजाय टैब या मोबाइल के सामने घंटों बैठे रहना भी वजन बढ़ाता है।
कारण:
- अतिरिक्त मीठे पदार्थों के साथ-साथ अप्रचलित आहार का अधिक उपयोग।
- तुम्हारा वक्त मोबाइल या टीवी के सामने बहुत हो रहा हो।
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी
- अनियमित नींद
- पारिवारिक (Genetic) कारण

मोटापे के संभावित खतरे
बचपन में वजन बढ़ने से आगे चलकर कई गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं। इस पर ध्यान न दिया जाए, तो शरीर के साथ-साथ दिमाग पर भी असर पड़ता है। मोटापे की वजह से बच्चों में ऊर्जा कम हो सकती है, खुद पर भरोसा टूट सकता है। उनका समाज से जुड़ने का मन छूट जाता है, जिससे उनका विकास रुक सकता है।
खतरे:
- डायबिटीज का खतरा
- दिल की बीमारियां
- हाई ब्लड प्रेशर
- आत्मविश्वास में कमी
- हवा कम पड़ने लगती है। थकावट चिपक सी जाती है।
बच्चों का वजन कैसे कंट्रोल करें?
थोड़ी-थोड़ी आदतें मिलकर बच्चे के वजन पर असर डालती हैं। हर रोज़ सब्ज़ियाँ खाना, फिर घंटों दौड़ना – ये दोनों जुड़े रहते हैं। इतना ही नहीं, गहरी नींद भी कमज़ोरी दूर करने में हाथ बँटाती है। माता-पिता की नज़र बच्चे के कामों पर टिकी रहे, यही बेहतर होगा। उनके छोटे फैसले बाद में आसान रास्ते दिखा सकते हैं।
उपाय:
- हर दिन फल खाना।
- एक घंटा हर रोज़ कुछ ऐसा करने में बिताओ, जो खेल जैसा लगे।
- हर रोज स्क्रीन पे कम समय बिताना।
- सुबह प्रकाश फैलते ही आंखें अपने आप खुल गई, रात को जल्दी सोने के बावजूद।
- मिठाई कम खाना शुरू कर दो। एकदम से कुछ दिनों में जल्दी वाला खाना छोड़ना पड़ सकता है।
वजन और हाइट के अनुसार सामान्य गाइड
| उम्र (Age) | औसत हाइट (cm) | सामान्य वजन (kg) |
|---|---|---|
| 8 साल | 125 – 130 | 22 – 30 |
| 9 साल | 130 – 135 | 25 – 35 |
| 10 साल | 135 – 145 | 28 – 40 |
| 11 साल | 140 – 150 | 30 – 45 |

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. क्या 47 किलो वजन हमेशा गलत होता है?
नहीं
Q2. बच्चे का सही वजन कैसे पता करें?
BMI से।
Q3. क्या डाइटिंग जरूरी है?
नहीं
Q4. रोज कितनी एक्सरसाइज जरूरी है?
60 मिनट
Q5. क्या मोटापा पूरी तरह ठीक हो सकता है?
हाँ
एक दस साल के बच्चे का 47 किलो वजन अभी खतरा नहीं जताता। ऊँचाई पर नजर रखना उतना ही जरूरी है, जितना खाने की आदतों पर। खेलने की आदत हो या घर के काम में हिस्सा – रोजमर्रा के फैसले मायने रखते हैं। अगर समय पर सही भोजन की शुरुआत हो, तो मोटापा रुक सकता है। इसे ठीक से समझना, छोटे बदलावों से शुरू होता है। माता-पिता की समझ ही बच्चे के स्वास्थ्य का सहारा बनती है।
मेरा नाम आदित्य सजवाण है। यह आर्टिकल मेरे द्वारा लिखा गया है , यदि यह आर्टिकल आपको थोड़ा – सा भी पसंद आया हो तो ऐसे ही आर्टिकल पढ़ने के लिए हमारी samacharbuddy.com से जुड़े रहे। तहे दिल से धन्यवाद!

